एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रम में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप उच्च शिक्षा में सुधार और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया है।
राज्य सचिवालय में शुक्रवार को हुई राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी से संबद्ध सभी सरकारी कॉलेजों में एनईपी लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कॉलेजों में एनईपी को प्रभावी ढंग से लागू करने का जोर दिया और कहा कि इससे छात्रों को व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
30 दिन के भीतर घोषित किए जाएंगे परिणाम
मंत्री ने कहा कि स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम में सेमेस्टर प्रणाली पहले ही सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। अब इसे यूजी में लागू करने से शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों के लर्निंग आउटकम में सुधार आएगा। उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को तकनीकी मूल्यांकन, स्पॉट मूल्यांकन और मजबूत आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए, जिससे परीक्षा परिणाम 30 दिनों के भीतर घोषित किए जा सकेंगे और परिणामों की पारदर्शिता बढ़ेगी।
2026-27 सत्र से एनईपी के अनुरूप नए पाठ्यक्रमों में शामिल हैं:
तीन वर्ष का स्नातक कार्यक्रम
चार वर्ष का ऑनर्स/ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम (अधिक छात्र संख्या वाले कॉलेजों में लागू)
पांच वर्ष का एकीकृत स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम
शिक्षकों के 389 पद भरेगी राज्य सरकार
रोहित ठाकुर ने लर्निंग आउटकम आधारित पाठ्यक्रम (LOCF) को अपनाने, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री कार्यक्रमों पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 389 पद भरने जा रही है और इस संबंध में प्रस्ताव प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।
75 से कम छात्रों वाले कॉलेजों का होगा युक्तिकरण
मंत्री ने कॉलेजों में आंतरिक रैंकिंग प्रणाली शुरू करने और संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देने के निर्देश भी दिए, ताकि वे अन्य संस्थाओं के साथ समझौते कर कौशल विकास और रोजगार आधारित कार्यक्रम शुरू कर सकें। उन्होंने अधिकारियों को 75 से कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों का युक्तिकरण करने के लिए कहा, जिससे शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एनईपी के तहत सेमेस्टर प्रणाली और आंतरिक मूल्यांकन तुरंत पूरी तरह लागू करना संभव न हो, तो कम से कम 50% तक इसे लागू किया जाए और धीरे-धीरे इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
