एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक/टीजीटी हिंदी के पद पर दी गई पदोन्नति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस पदोन्नति को जारी रहने दिया गया, तो यह अधिकारियों की ओर से की गई एक गैरकानूनी कार्यवाही को वैधता प्रदान करने जैसा होगा। अदालत ने इस मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही राज्य सरकार को अगली सुनवाई पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला और क्यों लगी रोक?
शिक्षा विभाग ने सेवारत जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक (टीजीटी हिंदी) के पदों पर प्रमोट करने के लिए एक विभागीय पदोन्नति समिति का गठन किया था। स्कूल शिक्षा निदेशक ने चंबा के प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक को निर्देश दिए थे कि केवल उन्हीं जेबीटी शिक्षकों की पदोन्नति पर विचार किया जाए, जो पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियम (R&P Rules 2009) के तहत योग्यता पूरी करते हों। इन पुराने नियमों के आधार पर विभाग ने 31 मार्च 2026 को जेबीटी शिक्षकों के पदोन्नति आदेश जारी कर दिए थे।
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कोर्ट में नियमों का टकराव: 2009 बनाम 2025 के नियम
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हिमाचल सरकार ने 18 फरवरी 2025 को टीजीटी हिंदी के लिए नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम-2025 अधिसूचित किए थे, जिन्हें 22 फरवरी 2025 को राजपत्र में प्रकाशित भी कर दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जैसे ही नए नियम (R&P Rules 2025) लागू हुए, वैसे ही 2009 के पुराने नियम स्वतः ही निरस्त हो गए थे। ऐसे में 18 फरवरी 2025 के बाद आयोजित की गई किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) को हर हाल में नए नियमों के आधार पर ही प्रमोशन करने चाहिए थे। पुराने नियमों के तहत दी गई पदोन्नति पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है।
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इस स्थगन आदेश (Stay Order) के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि नए नियम अधिसूचित होने के एक साल बाद भी पुराने नियमों के तहत प्रमोशन लिस्ट क्यों जारी की गई। अब सभी की नजरें 5 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा।
