एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर | हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर वन मंडल में पौधरोपण अभियान के दौरान सरकारी पौधों की कथित हेराफेरी और घोर लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभागीय जांच में खारसा चंगर नर्सरी से लाए गए ‘खैर’ के 1500 से 2000 पौधे घुमारवीं की एक निजी नर्सरी में बेचने का खुलासा हुआ है। मामला उजागर होते ही विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुड्डी बीट में तैनात आरोपी वन रक्षक निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही विभाग ने सीसीएस (CCS) नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारी पर 75,000 रुपये की पेनल्टी (जुर्माना) भी लगाई है।
गाड़ी रोककर जांच की तो खुला फर्जीवाड़े का राज
जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई को कुड्डी बीट में पौधरोपण के लिए खारसा चंगर नर्सरी से पौधे भेजे गए थे, जिन्हें बीट गार्ड लेकर गया था, लेकिन पौधे वहां नहीं पहुंचे। जब अधिकारियों को सूचना मिली कि पौधे प्लांटेशन क्षेत्र में पहुंचे ही नहीं हैं, तो उन्होंने वन रक्षक से पूछताछ की। गार्ड का जवाब असंतोषजनक मिलने पर विभागीय अधिकारियों ने खुद मौके पर जाकर जांच शुरू की। अधिकारी जब घुमारवीं की ओर जा रहे थे, तो भगेड़ के पास उन्हें खैर के छोटे-छोटे पौधों से लदा एक वाहन मिला। वाहन चालक से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह इन पौधों को घुमारवीं स्थित एक निजी नर्सरी से उठाकर वापस कुड्डी बीट ले जा रहा था। सच्चाई सामने आने के बाद विभागीय टीम तुरंत घुमारवीं की निजी नर्सरी पहुंची। वहां पूछताछ में नर्सरी संचालक ने भी स्वीकार किया कि वन रक्षक सरकारी पौधे उसके पास छोड़कर गया था। जांच में साफ हुआ कि आरोपी वन रक्षक ने पहले तो सरकारी पौधों को निजी नर्सरी में ठिकाने लगाया और जब अधिकारियों को शक हुआ, तो उन्हें चुपके से वापस लाकर प्लांटेशन साइट पर रखने की कोशिश कर रहा था।
“कुड्डी वन बीट में सरकारी पौधों को निजी नर्सरी में बेचने का मामला सामने आया था। जांच में बीट गार्ड की भूमिका पाई गई है, जिसके बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया है। आरोप बेहद गंभीर हैं और उसे चार्जशीट करने के लिए उच्च अधिकारियों को लिख दिया गया है।”
— मृत्युंजय माधव, अरण्यपाल (CF), बिलासपुर वन मंडल
