एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश में 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शिमला में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और विधायक दल के सचिव रणधीर शर्मा सहित पार्टी के प्रमुख विधायक उपस्थित रहे।
राजनीतिक बदले की भावना का आरोप और निंदा प्रस्ताव

बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए विधायक दल के सचिव रणधीर शर्मा ने बताया कि बैठक में प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा हुई। भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार की कार्यशैली की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है। भाजपा के विधायकों, पूर्व विधायकों, जिला परिषद सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों और नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर लगातार झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस, प्रशासन और सरकारी तंत्र का विपक्ष की आवाज दबाने के लिए राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है।
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5 अगस्त को शिमला में विशाल विरोध प्रदर्शन
कांग्रेस सरकार की इस प्रतिशोधात्मक राजनीति के खिलाफ भाजपा ने सड़कों पर उतरने का फैसला लिया है। 5 अगस्त को सुबह 10:00 बजे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के नेतृत्व में सीटीओ चौक, शिमला से एक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा। इसमें पार्टी के सभी विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। यह आंदोलन केवल शिमला तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में ले जाया जाएगा।
मानसून सत्र में इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी भाजपा
विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा प्रदेश से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी:
सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर की बदहाली: बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों, भूस्खलन, बिजली और पेयजल आपूर्ति की ठप व्यवस्था तथा सरकार की अपर्याप्त तैयारियों पर जवाब मांगा जाएगा।
आपदा राहत और पुनर्वास में विफलता: मानसून और प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित परिवारों के अधूरे पुनर्वास और क्षतिग्रस्त आधारभूत ढांचे के पुनर्निर्माण में देरी के मुद्दे पर सरकार को घेरा जाएगा।
कानून व्यवस्था: प्रदेश में पूरी तरह चरमराती कानून-व्यवस्था पर सदन में ठोस चर्चा की मांग की जाएगी।
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