एआरबी टाइम्स ब्यूरो, सोलन | हिमाचल प्रदेश में निर्मित 64 दवाओं के नमूने गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें बच्चों के सिरप, बुखार और खांसी की दवाओं के अलावा एंटीबायोटिक, विटामिन, इंजेक्शन और किडनी से जुड़ी दवाएं भी शामिल हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी अगस्त 2026 के ड्रग अलर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
अगस्त के ड्रग अलर्ट में देशभर में गुणवत्ता जांच में विफल 220 दवा नमूनों को शामिल किया गया है। इनमें हिमाचल प्रदेश की अलग-अलग दवा निर्माण इकाइयों के 64 नमूने हैं। जिलेवार आंकड़ों में सोलन सबसे आगे है, जहां निर्मित 33 दवाओं के नमूने फेल पाए गए। इसके बाद सिरमौर की 24, ऊना की 4, कांगड़ा की 2 और बिलासपुर की एक दवा गुणवत्ता जांच में असफल रही।
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राज्य और केंद्रीय प्रयोगशालाओं में हुई जांच
ड्रग अलर्ट के मुताबिक देशभर में फेल हुए 220 नमूनों में से 191 की जांच राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में हुई, जबकि 29 नमूनों की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में की गई। सूची में एक नमूना नकली भी पाया गया है। हिमाचल की जिन औद्योगिक इकाइयों के उत्पाद जांच में शामिल हुए हैं, उनमें बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, कुमारहट्टी, सोलन, बिलासपुर, ऊना और कांगड़ा के दवा उद्योग शामिल हैं। जांच के दौरान अलग-अलग नमूनों में दवा के घुलने की क्षमता, सक्रिय औषधीय तत्व की मात्रा, निष्क्रमण, पीएच और निर्धारित कण सीमा समेत विभिन्न गुणवत्ता मानकों से जुड़ी कमियां सामने आईं। कुछ कंपनियों के एक से अधिक उत्पाद भी जांच में असफल पाए गए हैं।
बच्चों की दवा से एंटीबायोटिक और इंजेक्शन तक
फेल नमूनों की सूची में पैरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन, मोंटेलुकास्ट और लेवोसेटिरिजिन सिरप, लाइनजोलिड टैबलेट, एजिथ्रोमाइसिन और लैक्टिक एसिड बेसिलस टैबलेट, सिटाग्लिप्टिन फॉस्फेट एवं मेटफॉर्मिन, विलोसाग्लिप्टिन, एसोमेप्राजोल मैग्नीशियम तथा कैल्शियम-विटामिन डी3 जैसी दवाएं शामिल हैं। एमिकासिन सल्फेट और राबेप्राजोल सोडियम जैसे इंजेक्शन, इट्राकोनाजोल कैप्सूल, प्रेगाबालिन टैबलेट और दर्द व सूजन में इस्तेमाल होने वाली एसिक्लोफेनाक-पैरासिटामोल जैसी दवाएं भी सूची में हैं।
कंपनियों को नोटिस, बैच की बिक्री पर रोक
राज्य औषधि विभाग के अनुसार गुणवत्ता जांच में असफल नमूनों से संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने की कार्रवाई भी शुरू की गई है। राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, कंपनियों से जवाब मांगा गया है। प्राप्त रिपोर्ट और जांच के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
