एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | स्वाइन फ्लू के बीच हिमाचल प्रदेश में अब स्क्रब टायफस के मामले भी बढ़ने लगे हैं। प्रदेश में अब तक 24 लोगों की स्क्रब टायफस रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। आईजीएमसी शिमला में किए गए आरटीपीसीआर टेस्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्क्रब टायफस के अधिकांश मामले चौपाल, संजौली, कनलोग, चायल, कुमारसैन और ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर खेतों, झाड़ियों और घास वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रब टायफस से बचाव के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। अस्पतालों में इन दिनों खांसी, जुकाम, बुखार और अन्य लक्षणों के साथ मरीज पहुंच रहे हैं। आवश्यकतानुसार मरीजों के टेस्ट करवाए जा रहे हैं। आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग करवा रहे हैं, ताकि संक्रमण की समय पर पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके। प्रदेश के अन्य अस्पतालों से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए आईजीएमसी रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है।
क्या है स्क्रब टायफस और कैसे फैलता है?
स्क्रब टायफस एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित लार्वा माइट्स के काटने से फैलती है। ये माइट्स मुख्य रूप से झाड़ियों, घास, खेतों और घनी वनस्पति वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनके काटने की जगह पर काली पपड़ी जैसा निशान बन सकता है, जिसे एस्चर (Eschar) कहा जाता है। स्क्रब टायफस से संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द, कंपकंपी, शरीर में अकड़न और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। समय पर जांच और उपचार मिलने पर बीमारी का इलाज संभव है।
स्क्रब टायफस से बचाव के उपाय
- घास या जमीन पर सीधे बैठने और लेटने से बचें।
- खेतों-झाड़ियों वाले क्षेत्रों में काम करते समय पूरी बाजू के कपड़े, लंबी पैंट और बंद जूते पहनें।
- घर के आसपास उगी घास, खरपतवार और झाड़ियों की नियमित सफाई करें।
- खेत या घने वनस्पति वाले क्षेत्र से लौटने के बाद नहाएं और कपड़े धोएं।
- तेज बुखार या अन्य लक्षण होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें।
- बुखार लगातार बना रहे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच करवाएं।
