एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने HIMUDA CEO-कम-सेक्रेटरी पद पर डॉ. सुरिंद्र कुमार वशिष्ठ की नियुक्ति रद्द कर दी है। कोर्ट ने माना कि उनकी नियुक्ति निर्धारित भर्ती नियमों के अनुरूप नहीं थी। न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया है कि सीईओ-कम-सेक्रेटरी का पद भर्ती नियमों के अनुसार दोबारा भरा जाए।
जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ की बेंच ने 27 मई 2025 को जारी डॉ. वशिष्ठ की नियुक्ति से संबंधित आदेशों को रद्द किया। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीईओ के तौर पर अब तक डॉ. वशिष्ठ को मिले वित्तीय लाभ की उनसे वसूली नहीं की जाएगी। यह मामला अंजोरी कपूर की याचिका पर सामने आया था। कपूर ने सरकार के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें सीईओ पद के लिए विचार करने के बजाय एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटेजी) के पद पर नियुक्त किया गया था।
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अदालत के सामने आए तथ्यों के अनुसार, अंजोरी कपूर को 9 दिसंबर 2022 को HIMUDA में नियमित चीफ इंजीनियर (सिविल) के पद पर पदोन्नति मिली थी। उस समय डॉ. सुरिंद्र वशिष्ठ अधीक्षण अभियंता (SE) के पद पर थे। 1 फरवरी 2023 को वशिष्ठ के SE पद को व्यक्तिगत आधार पर चीफ इंजीनियर के पद पर अपग्रेड किया गया। इसके अगले दिन उन्हें चीफ इंजीनियर पद पर पदोन्नत कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि यह अपग्रेडेशन व्यक्तिगत आधार पर था और वशिष्ठ के पद छोड़ने के बाद यह पद दोबारा SE का हो जाना था। इसलिए इससे चीफ इंजीनियर का दूसरा नियमित पद सृजित नहीं हुआ।
CEO पद के लिए जरूरी थी नियमित सेवा
हाईकोर्ट ने HIMUDA के 2012 के भर्ती नियमों और 2019 के संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि सीईओ-कम-सेक्रेटरी का पद पात्र चीफ इंजीनियर (सिविल) में से भरा जाना था। इसके लिए चीफ इंजीनियर के पद पर निर्धारित अवधि की नियमित सेवा समेत अन्य योग्यताएं जरूरी थीं। कोर्ट के अनुसार, डॉ. वशिष्ठ के पास चीफ इंजीनियर के रूप में आवश्यक नियमित सेवा नहीं थी। ऐसे में 27 मई 2025 को उनकी सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
अंजोरी कपूर को भी देना होगा मौका
कोर्ट ने यह भी पाया कि HIMUDA में नियमित चीफ इंजीनियर का एक ही पद था और उस पर अंजोरी कपूर नियमित रूप से पदोन्नत होकर कार्यरत थीं। इसके बावजूद 3 मई 2025 को इस पद को एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटेजी) के पद में बदल दिया गया और 27 मई को कपूर को इस नए पद पर नियुक्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अंजोरी कपूर को सीईओ-कम-सेक्रेटरी पद के लिए विचार से बाहर नहीं किया जाना चाहिए था। अब सरकार को भर्ती नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करते हुए सभी पात्र अधिकारियों के साथ अंजोरी कपूर के मामले पर भी विचार करना होगा।
