एआरबी टाइम्स ब्यूरो , शिमला | Himachal High Court ने राज्य में अवैध रूप से लकड़ी और अन्य वन संपदा की ढुलाई व तस्करी के मामलों पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सरकार और वन विभाग को वन संपदा की सुरक्षा तथा अवैध परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई के संबंध में कई निर्देश जारी किए। अदालत ने वन संपदा की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किए जाने पर वन विभाग के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि केवल संसाधनों या व्यवस्थाओं की कमी बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभाग को तकनीकी साधनों का बेहतर इस्तेमाल कर वन संपदा की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
जनवरी 2025 से जून 2026 तक 44 वन अपराध के मामले
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जनवरी 2025 से 7 जून 2026 के बीच राज्य के विभिन्न थानों में वन अपराधों से जुड़े 44 मामले दर्ज किए गए हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अंब रेंज में 102 वाहन और भरमौर रेंज में 172 वाहन बिना वैध अनुमति के वन उपज का परिवहन करते हुए पाए गए। वहीं गगरेट वन चेक पोस्ट से उचित और सत्यापित ट्रांजिट परमिट के साथ 6,201 वाहन कानूनी रूप से गुजर चुके हैं। सुनवाई के दौरान रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, अंब की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष रखी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान चेक पोस्ट के आसपास कुछ ऐसे ब्लाइंड स्पॉट हैं, जिनका फायदा उठाकर वन उपज की अवैध ढुलाई करने वाले वाहन चेक पोस्ट को बाईपास कर जाते हैं। रिपोर्ट में चेक पोस्ट को करीब तीन किलोमीटर आगे प्रस्तावित नए स्थान पर स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया है। माना गया कि इससे अंबोटा-होशियारपुर मार्ग से बचकर निकलने वाले वाहनों की निगरानी और प्रभावी तरीके से की जा सकती है। हाईकोर्ट ने संबंधित एसडीएम से इस सुझाव पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
पकड़े गए वाहनों की स्थिति पर कोर्ट ने मांगा जवाब
Himachal High Court ने सरकार के हलफनामे में पकड़े गए वाहनों के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं होने पर भी सवाल उठाए। अदालत ने सरकार से पूछा कि अवैध वन उपज ले जाते हुए पकड़े गए वाहनों का क्या किया गया और क्या उन्हें उनके पंजीकृत मालिकों को वापस सौंप दिया गया अथवा कानून के अनुसार उनका निपटारा किया गया। एसपी की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कई एफआईआर का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट ने इन मामलों में जब्त वाहनों की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने वन विभाग के अनुपालन हलफनामे में पेड़ों और वाहनों की निगरानी को लेकर जताई गई लाचारी पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने विभाग से पूछा कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर वन संपदा की निगरानी और प्रबंधन को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को होगी। तब तक सरकार को सभी बिंदुओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
