एसजेवीएन की 1500 मेगावाट परियोजना में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। मजदूर अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन परियोजना प्रबंधन की ओर से अब तक कोई ठोस और सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के उपाध्यक्ष कामरेड गुरदास ने कहा कि मजदूरों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना प्रमुख द्वारा कुछ कर्मचारियों को “राइजिंग डे” के अवसर पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है, लेकिन इसमें भी मजदूरों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर अन्य कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
जिला अध्यक्ष कामरेड कुलदीप डोगरा ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों का हनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पीआईएस विभाग के कर्मचारियों का सितंबर 2025 माह का ईपीएफ अंशदान अब तक उनके खातों में जमा नहीं किया गया है। इस गंभीर मामले को लेकर मजदूरों में भारी रोष व्याप्त है तथा वे प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यूनियन के महासचिव कामराज ने कहा कि प्रबंधन द्वारा यूनियन के मांग-पत्र पर कोई सार्थक चर्चा नहीं की जा रही है। लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए कई बार आग्रह किए जाने के बावजूद प्रबंधन का रवैया उदासीन बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही मजदूरों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी परियोजना प्रबंधन की होगी।
धरने में शामिल सैकड़ों मजदूरों ने एकजुटता का परिचय देते हुए अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और प्रबंधन से तत्काल वार्ता कर समस्याओं का समाधान करने की मांग उठाई।
