एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
जिला शिमला में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की संस्थागत निगरानी और उपचार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के संचालकों और संबंधित प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
उपायुक्त ने कहा कि नशे से मुक्ति केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित व्यक्ति को पुनर्वास के माध्यम से परिवार और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। केंद्रों के संचालन में निर्धारित नियमों और मानकों का पालन अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नशा मुक्ति केंद्रों में नशे की शिकायतें गंभीर
अनुपम कश्यप ने नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के लिए आने वाले लोगों को नशा उपलब्ध करवाए जाने संबंधी शिकायतों को गंभीर बताया। उन्होंने केंद्र संचालकों को सुरक्षित और पूर्णत: नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर जीवन की उम्मीद के साथ इन केंद्रों में भेजते हैं, इसलिए संचालकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा और डॉ. कुशाल वर्मा ने केंद्रों के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों की जानकारी दी। बताया गया कि उपचार केंद्रों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें अल्पकालिक डिटॉक्सिफिकेशन, दीर्घकालिक उपचार एवं पुनर्वास तथा नशे के साथ मानसिक रोगों के उपचार वाले केंद्र शामिल हैं।
केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सक, आवश्यकता के अनुसार मनोचिकित्सक और प्रत्येक 30 मरीज पर कम से कम एक पूर्णकालिक काउंसलर की उपलब्धता जरूरी है। मरीजों का पंजीकरण, यूनिक आईडी, चिकित्सकीय मूल्यांकन, लिखित सहमति, दवाओं का रिकॉर्ड और डिस्चार्ज समरी सहित सभी अभिलेख सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। मरीजों की गोपनीयता भी कानून के अनुरूप सुनिश्चित करनी होगी।
एनडीपीएस एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
एसएसपी गौरव सिंह ने कहा कि नशामुक्त समाज के लिए नशा तस्करों पर कार्रवाई के साथ नशे से पीड़ित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी समान गंभीरता से काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नशा मुक्ति केंद्र में नशे का कारोबार पाया जाता है तो केंद्र संचालक के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। ऐसे मामलों में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
उपायुक्त ने केंद्र संचालकों से उपचार, परामर्श, सुरक्षा, स्वच्छता, रिकॉर्ड संधारण और शिकायत निवारण व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिला शिमला के नशा मुक्ति केंद्र प्रदेश के लिए बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करें, इसके लिए प्रशासन गुणवत्ता और संस्थागत निगरानी पर लगातार नजर रखेगा।
