एआरबी टाइम्स ब्यूरो, धर्मशाला | हिमाचल प्रदेश के पालमपुर उपमंडल में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने एक महिला को करीब सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने नियंत्रण में रखा और उससे 15 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने महिला को उसके बैंक खातों के गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त होने का डर दिखाया। पीड़िता की शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस थाना धर्मशाला में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर किया फोन
पीड़िता को 18 सितंबर को दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन आया था। कॉल करने वालों ने खुद को दिल्ली के दरियागंज पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। इसके बाद महिला को बताया गया कि उसके बैंक खातों का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया है। आरोपियों ने महिला पर लगातार दबाव बनाए रखा और जांच के नाम पर उसे सात दिन तक निगरानी में रखा। उसे किसी परिजन या परिचित से संपर्क नहीं करने की हिदायत भी दी गई। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर साइबर ठगों ने महिला को मानसिक दबाव में रखा।
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बैंक खाते में NEFT के जरिये ट्रांसफर किए 15 लाख
साइबर ठगों ने महिला को एक बैंक खाता संख्या और IFSC कोड उपलब्ध कराया। आरोपियों के निर्देश पर महिला ने उस खाते में NEFT के माध्यम से 15 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद महिला को जब पूरे मामले में ठगी का एहसास हुआ तो उसने तुरंत साइबर थाना धर्मशाला पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। साइबर अपराधियों की ओर से लोगों को जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर डराने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ठग अकसर बैंक खाते, सिम कार्ड या पहचान पत्र के आपराधिक इस्तेमाल का डर दिखाकर वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ का नाटक करते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय पैदा कर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
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अनजान कॉल पर बैंक डिटेल साझा न करें
एसपी कांगड़ा कुलभूषण वर्मा ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक से जुड़ी जानकारी, OTP या धनराशि साझा अथवा ट्रांसफर न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर पुलिस अथवा किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर डराता है तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाने को इसकी सूचना दें। कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम का कोई प्रावधान नहीं है।
